The power of thought

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Wednesday, June 29, 2011

सड़क पर बूढ़ा आदमी

सावधान !
ख़बरदार !!
होशियार !!!
ये है एक सरकारी फरमान 
कोई भी निकलेगा नहीं अपने घर से बाहर,
क्योंकि सड़क पर टहल रहा है एक बूढ़ा इंसान |

अख़बार!
रेडियो!!
टेलीविजन !!!
कर दो इन सबको बंद ,
सरकार कि नीतियों  कि कोई नहीं पड़ेगा आलोचना ,
क्योंकि अंधकार में दिया जलाने कि कोशिश कर रहा है एक बूढ़ा आदमी |

ट्विटर !
फेसबुक !!
इन्टरनेट !!!
इन सब पर लागु है अब सेंसर ,
कैबिनेट मीटिंग से बाहर नही आयेंगे अब कोई घोटाले ,
क्योंकि हर घोटाले कि सूची पढ़ रहा है एक बूढ़ा आदमी |

भ्रष्टाचार !
बलात्कार !!
अत्याचार !!!
हो रहे हैं,होते रहेंगे ,
पर उफ़ तक न करोगे तुम किसी के सामने 
क्योंकि तुम्हारी व्यथा से  व्यथित है एक बूढ़ा  आदमी |

लोकपाल !
जोकपाल !!
भोकपाल !!!
सब बातें है बेकार ,
P .M . के सर पर नहीं होगा कोई सवार,
क्योंकि नहीं देंगे  हम पकड़ने किसी को अपना गिरेबान |

पर ,आह ! जंतर-मंतर पर फिर से बैठने वाला है वो बूढ़ा इंसान |
आज फिर से सड़क पर निकला है एक बूढ़ा इंसान |

Tuesday, June 28, 2011

दशावतार की प्रतीक्षा

रात के पहरुओ में,
अंधकार के झुरमुटो में |
एक टीस हो गयी ,
सुनी आँखे पानी से भर गयी ||
राम और केशव की जन्म-भूमि,
निवेदिता और टेरेसा की अतुलनीय कर्म-भूमि ,
लुट चुकी है 
बिक चुकी है |
अपने ही प्रांगण में बेआबरू हो खड़ी है,
कृष्ण के इंतज़ार में द्रौपदी रो पड़ी है ||
युधिष्ठर सा सौम्य यहाँ नहीं चाहिए ,
यहाँ तो भीम की प्रलयंकारी गर्जना गुंजायमान होनी चाहिए |
विभीषण सा भ्राता न भी हो तो गम नहीं,
कर्ण से सखा से कुछ कम हम अब स्वीकार नहीं ||
माताओं  की सुनी कोखों की,
बहनो की झिलमिलाती अंखियो की 
प्रतीक्षा कब समाप्त होगी ?
घोटालों  के इस देश में कब दशावतार की शुभ वो घडी होगी??




Saturday, June 11, 2011

स्वप्न की बेला

स्वप्न की बेला टूटेगी कब 
पौरुषता जागेगी कब|
आशंका के बादल ठीठकेंगे कब
ये भयावरण उतरेगा कब ||

मानवता चीखी थी जब 
लोकतंत्र रोया था जब |
अत्याचार मुस्काया था जब 
देख बेटे की लाश माँ रोई थी जब ||

अन्याय वेला घिर आई है अब 
लगता पाप से हारा है पुण्य अब |
एक बिजली सी कौंधी है अब 
न बैठेंगे अब खामोश हम ||

अब हैं खड़े भयावरण को उतार सब
देखते हैं अब सीधे आँखों में आँखें डाल सब ||
हैं हाथो में हाथ डाले तैयार सब 
निर्वस्त्र माँ को पहनाएंगे अब वस्त्र सब||