The power of thought

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Sunday, January 29, 2012

मानव कितना मानव !!!!!

मनुष्य ईश्वर की श्रेष्ठ  रचना है , यह एक ऐसी धारणा है जिसे धारण कर ये पूरी मनुष्य जाति आत्म-मुग्ध हो रही है । मनुष्य या मानव कितना गिर सकता है , हम इसकी कल्पना भी नही कर सकते ।
  3 साल की बच्ची जिसे देख कर किसी को भी उसपर ममता आ सकती है , जिसे हम दुलारना पसंद करेंगे , उस चंचला बालपन को भी हवस का शिकार बना कर हम क्या साबित करना चाहते है ? अपनी दादी की उम्र की महिला जिन्हें देख कर सामान्यता कोई भी इंसान आशीर्वाद की कामना करेगा को भी अपनी हवस मिटाने का एक जरिया भर समझना इंसानियत को कहाँ ले जा कर कहाँ खड़ा  करेगा ??
   मानव और दानव ..काफी सूक्ष्म अंतर है दोनों के मध्य । अपने कर्मों के माध्यम से देवता बनना चाहे ही कितना कठिन हो , दानवता को गले लगाना काफी सरल प्रतीत होता है । सारे बुरे और पापों के मध्य जीवन बीता  कर ,उनसे अपनी आँखों को फेर कर क्या हम ये उम्मीद लगाये बैठे है की अगर कहीं ईश्वर की सत्ता है तो वो हमें इस जीवन के बाद स्वीकार कर लेगी ? किसी जंगल में अगर किसी एक भी जानवर को कोई शिकारी अपना निशाना बनाता है तो पूरा जंगल रोता है , यहाँ एक दलित महिला सिर्फ अपने दलित होने के कारण सारे बाज़ार नंगी हो पिटती है और पूरा देश तमाशा देखता है । 
   2  वर्ष पूर्व पटना में एक महिला को  वहां के व्यस्ततम जगह "गाँधी मैदान " पर निर्वस्त्र कर भरी दोपहर पीटा गया हजारों लोगो के सामने । ऐसा नहीं है की वहां मौजूद सभी लोग तमाशा ही देख रहे थे कुछ लोगो ने हिम्मत भी दिखाई और उस "मनोरंजक नज़ारे " को अपने कैमरे और मोबाइल में कैद कर लिया ताकि उसे बाद में अपने दोस्तों को दिखा सके। ऐसा क्यों हो गया है की हमारी कोई भी जिम्मेदारी नहीं , क्यूँ हर खूबसूरत लड़की को हम बस अपनी प्रेमिका ही बनाना चाहते है ,क्या वो बहन नहीं बन सकती ? क्यों समाचार में किसी असहाय इंसान का समाचार पढ़ कर हम अगला पन्ना खोल लेते है , क्यों हम इत्मिनान से बैठे रहते है ? 
   क्यूँ हम कर्मों से भी मानव बनने का प्रयास नहीं करते ? क्यों हम विश्वास और ईमान से नहीं जी सकते ?



Saturday, January 28, 2012

कहाँ है गाँधी

गाँधी की आत्मा पुनः लौट कर यह देखने आई की क्या गाँधी अब भी लोगों के दिलों में हैं ?
            उसने देखा अब वो बस जेबों और दीवारों पर ही हैं । कहीं और नहीं ।


Thursday, January 26, 2012

भेड़िये की दयालुता

"तुने मुझे गाली क्यों दी रे "भेड़िये ने बकरी के मेमने से पुछा ।
"मैंने.....नहीं ...कभी नहीं ...माँ कसम "
"तो तेरे बाप ने दी होगी "
"..........." मेमना रोने लगा ।
"अबे रो मत ...जा खेल "
अगले ही पल मेमना भेड़िया की जयजयकार करता जा चुका था । भेड़िये की दयालुता के किस्से जंगल में हर तरफ थे ।

अरे हाँ .....2  महीने बाद जंगल में आम चुनाव भी थे ।

Thursday, January 12, 2012

जंगल-राज

भेड़ों के मतों के सहारे जंगल का राजा बने भेड़िया ने शपथ-ग्रहण करते ही अपना पहला आदेश दिया |
   "जंगल की सभी भेड़ों का तत्काल सर-कलम कर दिया जाये "



Monday, January 9, 2012

सुपरस्टार

उसका नया गीत हर किसी की जबान पर था | वह स्टार बन चुका था |
               अगले ही हफ्ते हर मोबाइल में किसी दुसरे गीतकार  का नया गीत  धूम  मचा  रहा  था |


Monday, January 2, 2012

अच्छा राजा !!!

लक्ष्मण ने बीस साल बाद फिर लंका लौट कर वहां का दौरा  किया |
  "आप का पुराना राजा नीच और कपटी  था ....नया राजा धर्मात्मा  हैं   "
एक लंका वासी "पर रावण ने हमें सोने का महल दिया था .....अभी हम कुटिया में हैं "