The power of thought

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Friday, March 2, 2012

दवा की जात

रामलोचन शर्मा ब्राम्हणों के अलावा किसी का छुआ हुआ पानी भी नही पीते थे ।
अगली सुबह उन्हें 102' बुखार था ।
  "डॉक्टर ,तुम वैसे हो किस खानदान से "
   "शर्मा जी...लोग उसे अछूत खानदान कहते हैं , मेरे पिता लाशों को आग दिया करते थे "
   "डॉक्टर ...जल्दी से दवा दो , प्राण हैं की छुटने को निकल रहे हैं "
और शर्मा जी ने डॉक्टर के हाथ से दवा पीकर चैन पाया ।



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