The power of thought

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Sunday, December 25, 2011

किसको सजा ???

"पापा,मुझे उस कंपनी का जूता चाहिए " मुन्ना ने कहा |
मैं "क्यूँ रे?....अभी नहीं अगले महीने ही दूंगा | अभी पैसे नहीं |"
शाम रिक्शा खींच कर आने के बाद देखा मुन्ना की माँ उसकी सेवा कर रही है |

"जूते न होने से आज मुन्ना को बहुत मार पड़ी "रोते हुए बीवी ने कहा |
मैं जमीन पर बैठ गया | मुन्ना के जख्म मेरी पीठ पर बन चुके थे|


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