The power of thought

The power of thought

Thursday, September 1, 2011

बोला दमनक

होम कर संपूर्ण सृष्टि 
जहाँ तलक थी उसकी दृष्टि |
सृष्टि जीवन को करके स्वाहा
नष्ट कर हर एक बाधा ||

क्रूरता,हाहाकार,मातम 
शुष्क साँसे,बंद साँसे |
हस्तिनापुर की वो यादें 
आधुनिक जयचंदों के वादें ||

सब समेट कर
कुछ विचार कर|
प्रलयंकारी आँखें वो सिसकी 
मौत की लीला छन भर को ठिठकी ||

भ्रष्टाचारियो की दुरात्मा  
जा चुकी थी दोजख के रास्ता ||

मंगल वेला का कर के स्वागत 
क्रूर मौत बंद कर अपनी आँखें |
शुभ सन्देश कर समर्पित 
प्राण-वायु कर प्रतिष्ठित ||

 स्वलोक पधारी वो शक्ति
देख उस समाज प्रगति |
था अब दमनक यूँ बोला 
"हो दशक बाद फिर हमारा बोलबाला "

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