उस जंगल में आया वो नया जानवर था ,जो खुद के ईमान कि दुहाई देता हुआ व जंगल को बदलने का दावा करता आया था । बाकि जानवरों ने उस पर ध्यान नही दिया और वह भूखा ही नारे लगाते हुआ भटकने लगा । दस दिनों बाद शेर उसके सामने से गुजरा उसकी भूखी आँखों को देख शेर को अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने का एक उपाय समझ आया औरवह उसकी ओर अपना जूठा फेंक चलता बना । पंद्रह घंटों के इन्तेजार का बाद उसने यहाँ देखा , फिर वहाँ और जूठी रोटी खाने में लग गया ।
it's a blog all about things ..we just cross in our life , realize that these are worth but keep placing a blind eye on them.. it is "Power of Thought"
The power of thought
Tuesday, December 24, 2013
Thursday, September 19, 2013
कौन
हर दिन, हर पल हर सांस
अब बस आता एक सवाल है
कि मैं तेरा व तू मेरी कौन है ?
तू मेरी कौन यह जानता हूँ ,
इस संसार को हूँ सकता बतला कि
तू मेरी जान ,मेरा विश्वास मेरा अभिमान है ।
मैं रण में मूर्छित लक्ष्मण ,तू
मेरे प्राण वो संजीवनी है ।
मैं रेत पर तड़पती मछली , व
मेरी तू ज़िन्दगी वो पानी है ।
अब भटकता मैं शरीर , मेरी तू रूह है ।
जिसे हूँ मैं चाहता, तू ही मेरी वह महबूब है ।
मैं हूँ सा एक सुहागन ,मेरा तू श्रृंगार है ।
फिर भी है मेरा दिल पूछता मुझसे,
"बता वो तेरी कौन है ?"
तब कहता हूँ उससे कि ,जैसे
ग्रहों को सूर्य,वर्षा को मेघ व् जीवन को जल
अनिवार्य है , ठीक वैसे ही
"मेरे इस जीवन का अब तू आधार है । "
पूछता फिर वो नादान है कि तो
"मैं तेरा कौन हूँ " जो बता पाना आसान है
उसे हूँ समझाता कि
"वो चाँद मैं उसका चकोर, वह आग मैं पतंगा हूँ ।
है वो शमा मैं परवाना , वह धूल और मैं बूंद हूँ ।
वह तितली मैं फूल , वह कमल मैं गुंजायमान हूँ ।
मैं जीवन वह सांस , वह ऋचा और मैं उसका पाठ हूँ । "
अब वो है जानता की तू मेरी कौन है
लेकिन बात ये अब भी रही अधूरी है ,क्युकी
मेरी ज़िन्दगी में बाकी अब भी
लिखी जानी , तेरी कहानी है ॥
Saturday, September 14, 2013
अबूझा
"हद है भाई , इतनी भीड़ में ये लोग जो देख भी नहीं सकते , कैसे घुसे चले आते है सफ़र करने को ? और तिस पर इनके परिवार वाले इन्हें दिल्ली जैसी जगह में अकेले कैसे भेज सकते हैं ? किसी ने ठेका थोड़े ही ले रखा है , इन अन्धो का । " दिल्ली की बस में सफ़र करता हुआ वह १ अंधे की असहजता पर भड़का हुआ था, और उसे यह भी नहीं पता की वो आखिर भड़का क्यों ?
जवाब उसे थोड़ी देर में सारे सवालों का खुद ही मिल गया , जब बस स्टैंड से उस अंधे को उसके घर तक वह हाथ पकड़ छोड़ आया ॥
जवाब उसे थोड़ी देर में सारे सवालों का खुद ही मिल गया , जब बस स्टैंड से उस अंधे को उसके घर तक वह हाथ पकड़ छोड़ आया ॥
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