The power of thought

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Sunday, December 25, 2011

किसको सजा ???

"पापा,मुझे उस कंपनी का जूता चाहिए " मुन्ना ने कहा |
मैं "क्यूँ रे?....अभी नहीं अगले महीने ही दूंगा | अभी पैसे नहीं |"
शाम रिक्शा खींच कर आने के बाद देखा मुन्ना की माँ उसकी सेवा कर रही है |

"जूते न होने से आज मुन्ना को बहुत मार पड़ी "रोते हुए बीवी ने कहा |
मैं जमीन पर बैठ गया | मुन्ना के जख्म मेरी पीठ पर बन चुके थे|


Monday, November 7, 2011

ऑटो वाला 


दिल्ली की चिलचिलाती धुप में 
सवारी की तलाश में 
यहाँ से वहाँ भटकता हुआ,
परेशान दिखता है,वो ऑटो वाला |

घरवालों का पेट पालने को 
पांच रुपये की झिक झिक करता है ,
सवारी की गाली सुनकर भी 
मंजिल तक पहुंचाता है, वो ऑटो वाला |

संत भाव से निर्लिप्त रह 
कनाट-प्लेस की चकाचौंध और
मुनिरका की तंग गलियों से
विरक्त रह ,सवारी तलाशता है,वो ऑटो वाला |

उम्र की ढलान पर 
जब होती है चाह आराम की
पालने को घर का पेट 
रह भूखे भटकता है, वो ऑटो वाला |

अब दिल्ली की इस कंपकपाती ठंड में 
चार पैसे कमाने की जुगत में,
यहाँ से वहाँ भटकता हुआ 
सवारी की तलाश में 
है परेशान बैठा हुआ वो ऑटो वाला || 

Thursday, September 1, 2011

बोला दमनक

होम कर संपूर्ण सृष्टि 
जहाँ तलक थी उसकी दृष्टि |
सृष्टि जीवन को करके स्वाहा
नष्ट कर हर एक बाधा ||

क्रूरता,हाहाकार,मातम 
शुष्क साँसे,बंद साँसे |
हस्तिनापुर की वो यादें 
आधुनिक जयचंदों के वादें ||

सब समेट कर
कुछ विचार कर|
प्रलयंकारी आँखें वो सिसकी 
मौत की लीला छन भर को ठिठकी ||

भ्रष्टाचारियो की दुरात्मा  
जा चुकी थी दोजख के रास्ता ||

मंगल वेला का कर के स्वागत 
क्रूर मौत बंद कर अपनी आँखें |
शुभ सन्देश कर समर्पित 
प्राण-वायु कर प्रतिष्ठित ||

 स्वलोक पधारी वो शक्ति
देख उस समाज प्रगति |
था अब दमनक यूँ बोला 
"हो दशक बाद फिर हमारा बोलबाला "