The power of thought

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Thursday, September 1, 2011

बोला दमनक

होम कर संपूर्ण सृष्टि 
जहाँ तलक थी उसकी दृष्टि |
सृष्टि जीवन को करके स्वाहा
नष्ट कर हर एक बाधा ||

क्रूरता,हाहाकार,मातम 
शुष्क साँसे,बंद साँसे |
हस्तिनापुर की वो यादें 
आधुनिक जयचंदों के वादें ||

सब समेट कर
कुछ विचार कर|
प्रलयंकारी आँखें वो सिसकी 
मौत की लीला छन भर को ठिठकी ||

भ्रष्टाचारियो की दुरात्मा  
जा चुकी थी दोजख के रास्ता ||

मंगल वेला का कर के स्वागत 
क्रूर मौत बंद कर अपनी आँखें |
शुभ सन्देश कर समर्पित 
प्राण-वायु कर प्रतिष्ठित ||

 स्वलोक पधारी वो शक्ति
देख उस समाज प्रगति |
था अब दमनक यूँ बोला 
"हो दशक बाद फिर हमारा बोलबाला "

Saturday, July 16, 2011

अनंत की तलाश में

अनंत की तलाश में भटकता हूँ,
प्रकाश की डोर तलाशता हूँ |
देर रात तक जगता हूँ ,
बाँध टकटकी तारे तकता हूँ|
वीरान उजाड़ हवेली में अब भी रहता हूँ

मैं अनंत की तलाश में भटकता हूँ ||
 
हर रात डरकर सोता हूँ ,
सूरज की किरणों से भी अब घबराता हूँ |
क्यूँ जाने से बाहर कतराता हूँ,
कुशलक्षेम पूछे को व्याकुल रहता हूँ |
माचिस की तीली से भी डर जाता हूँ 
 
अब हर रात मैं डरकर सोता हूँ ||

मीठी मीठी बातों से झुँझलाता हूँ,
तीखे व्यंग्य हंसकर झेल जाता हूँ |
दोस्तों के साथ जाने से डर जाता हूँ,                                  
दुश्मनों संग बैठ ठहाके लगाता हूँ |
 किसी पर नही अब विश्वास कर पाता हूँ 

क्यूँ मीठी मीठी बातों से झुँझलाता हूँ ||
 
नेताओं की करता पूजा हूँ,
प्रताप-शिवा को देता गाली हूँ |
दुर्जन संग खुशियाँ लुटाता हूँ,
सज्जनो से परे हट जाता हूँ|
अमावस की रात चाँदनी नहाता हूँ

 मैं अनंत की तलाश में भटकता हूँ ||

Wednesday, June 29, 2011

सड़क पर बूढ़ा आदमी

सावधान !
ख़बरदार !!
होशियार !!!
ये है एक सरकारी फरमान 
कोई भी निकलेगा नहीं अपने घर से बाहर,
क्योंकि सड़क पर टहल रहा है एक बूढ़ा इंसान |

अख़बार!
रेडियो!!
टेलीविजन !!!
कर दो इन सबको बंद ,
सरकार कि नीतियों  कि कोई नहीं पड़ेगा आलोचना ,
क्योंकि अंधकार में दिया जलाने कि कोशिश कर रहा है एक बूढ़ा आदमी |

ट्विटर !
फेसबुक !!
इन्टरनेट !!!
इन सब पर लागु है अब सेंसर ,
कैबिनेट मीटिंग से बाहर नही आयेंगे अब कोई घोटाले ,
क्योंकि हर घोटाले कि सूची पढ़ रहा है एक बूढ़ा आदमी |

भ्रष्टाचार !
बलात्कार !!
अत्याचार !!!
हो रहे हैं,होते रहेंगे ,
पर उफ़ तक न करोगे तुम किसी के सामने 
क्योंकि तुम्हारी व्यथा से  व्यथित है एक बूढ़ा  आदमी |

लोकपाल !
जोकपाल !!
भोकपाल !!!
सब बातें है बेकार ,
P .M . के सर पर नहीं होगा कोई सवार,
क्योंकि नहीं देंगे  हम पकड़ने किसी को अपना गिरेबान |

पर ,आह ! जंतर-मंतर पर फिर से बैठने वाला है वो बूढ़ा इंसान |
आज फिर से सड़क पर निकला है एक बूढ़ा इंसान |