The power of thought

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Monday, July 9, 2012

सबका मालिक एक !!


भूखी प्यासी आँतों के बीच 
पथराई आँखों के बीच 
बेबस बिलखती रूहों के बीच 
क्या है सबका मालिक एक??

कोई करोड़ों के महलों में सो नही पाता है 
कहीं कोई वृक्ष तले सोने की कोशिश करता है 
कोई पकवान पचाने को हाकिम बुलाता है 
कोई हाकिम के अभाव में भूखा मर जाता है 
फिर क्या हो सकता है इन सबका मालिक एक ??

कोई गरीबों पर सारी दौलत लुटा देता है 
कोई किसी बुढ़िया का गल्ला ले भाग जाता है 
कोई प्यार ,प्रेम,मानवता,का सन्देश देता है 
कहीं कोई मजलूमों पर गोलिया चलाता है 
क्या संभव है की हो इन सबका मालिक एक??

अस्पतालों में भी है असमानता 
कहीं जच्चा-बच्चा मरते हैं द्वार पर 
तो है कोई आई.सी.यू  के आरामगाह में ।
कोई डॉक्टर तुम्हारी किडनी और जान ले जायेगा 
तो कोई रिक्शा वाला बचाने तुम्हारी जान अपनी दे जायेगा ।।
तो वो प्रश्न फिर सर उठाता  है 
की क्या है वाकई 
हम सबका मालिक एक??

Sunday, July 8, 2012

दान

राष्ट्र उत्थान हेतु,
था लगा कुबेरों का मेला 
वहां आ पहुंचा एक भिखारी लिए अपना थैला मटमैला ।
नब्बे फीसदी दान करने वाले 
बड़े कुबेर ने थी ज्यों अपनी आँखे तरेरी,
छोटे सभी कुबेरों ने उस गरीब की बाँहें मरोड़ी 
"अब यहाँ ऐसा क्या बचा जो तू देगा,
या तू यहाँ से भी भीख ही लेगा "

निर्धन उस भिखारी ने खोल थैला 
सौंप दिया अपना कलेजा ।
उसकी वहीँ मौत हो गयी 
धनकुबेरों की शाम ने न आयी कोई परेशानी 
भारतमाता के कलेजे में एक फांस हो गयी ।।


Tuesday, July 3, 2012

लेकिन .....आज

माँ की लोरियां 
पिता की झिडकियां 
दादा-दादी की कहानियां 
और दीदी की चुराई मिठाइयाँ 
अब आज याद आती हैं ।।

स्कूल से भाग दोस्तों संग 
बाग जा जामुन चुराना,
नदी में जा गोते लगाना 
पर्वतों पर दौड़ना 
और सिनेमाहाल में दस की खरीद 
बीस की सीट पर बैठ देखना ,
अब आज याद आते है ।।

रात में छत पर बैठ 
भूतों से डरना,आपस में लड़ना 
दूध से भरे ग्लास को नाली में देना 
बिल्लियों को देख खुद में दुबकना 
और किसी की आहट सुन झट से सो जाना 
अब आज वो याद आते हैं ।।

चलो आज बीते कल में चलते हैं 
फिर से किसी को ठगते हैं 
मछलियों संग डुबकी लगा 
बादलों संग उड़ जाते है ।
लेकिन .....आ!!!!!!