The power of thought

The power of thought

Sunday, March 4, 2012

वो थी कूड़े के ढेर पर

चीखती,लहरती दोपहर में 
बरसा कर अपने कहर को 
हो उन्मुक्त जब सूरज छा रहा था
वो थी कूड़े के ढेर पर ।।

कर पैदा बना लावारिस 
फेंक कर उस ढेर पर 
जब लौट चूका था उसका जन्मदाता 
रो रही थी वो उस कूड़े के ढेर पर ।।

मनमोहती,खिलखिलाती 
गोधुली के उस पहर में,
लौटती कारों के बीच
थी बिलखती वह कूड़े के ढेर पर ।।

सभ्यता की दे दुहाई 
हैं समाज बन दुश्मन बैठा 
जिसकी न थी कोई गलती 
वो क्यूँ पड़ी थी कूड़े के ढेर पर ।।

रात्रि के अंतिम प्रहर में 
मार समाज के मुहं पर चांटा 
बन के आए मुक्तिदाता
 नोच खाया उस नन्ही जाँ को

चीख से दहली थी दिल्ली 
फिर क्यों नहीं थी कोई रूह कांपी ?

बन के एक श्वान  ग्रास
हुआ निवारण उसका त्रास

खाली था अब कूड़े का वो ढेर ।
पर थी कभी पड़ी वो उस कूड़े के ढेर पर 



Friday, March 2, 2012

दवा की जात

रामलोचन शर्मा ब्राम्हणों के अलावा किसी का छुआ हुआ पानी भी नही पीते थे ।
अगली सुबह उन्हें 102' बुखार था ।
  "डॉक्टर ,तुम वैसे हो किस खानदान से "
   "शर्मा जी...लोग उसे अछूत खानदान कहते हैं , मेरे पिता लाशों को आग दिया करते थे "
   "डॉक्टर ...जल्दी से दवा दो , प्राण हैं की छुटने को निकल रहे हैं "
और शर्मा जी ने डॉक्टर के हाथ से दवा पीकर चैन पाया ।



Sunday, February 5, 2012

असली खतरा !!

वह  एक कार-मैकेनिक था । उसके बाप की मौत कार-दुर्घटना से हुई । उसकी बीवी और छोटे बच्चों को कार ने धक्का मार दिया ,उनकी वहीँ मौत हो गयी । उसकी माँ और सास-ससुर कार पलटने से मर गए ।
           काम करते करते उसकी नजर बाहर गली में  चल रहे बिच्छु  पर पड़ी । कहीं रात में उसके काटने से उसकी मौत न हो जाये ,इस डर से उसने तुरंत उसे कुचल कर मार दिया ।
          उसके बाद वो वापस कारों के बीच लौट आया ।