The power of thought

The power of thought

Monday, November 7, 2011

ऑटो वाला 


दिल्ली की चिलचिलाती धुप में 
सवारी की तलाश में 
यहाँ से वहाँ भटकता हुआ,
परेशान दिखता है,वो ऑटो वाला |

घरवालों का पेट पालने को 
पांच रुपये की झिक झिक करता है ,
सवारी की गाली सुनकर भी 
मंजिल तक पहुंचाता है, वो ऑटो वाला |

संत भाव से निर्लिप्त रह 
कनाट-प्लेस की चकाचौंध और
मुनिरका की तंग गलियों से
विरक्त रह ,सवारी तलाशता है,वो ऑटो वाला |

उम्र की ढलान पर 
जब होती है चाह आराम की
पालने को घर का पेट 
रह भूखे भटकता है, वो ऑटो वाला |

अब दिल्ली की इस कंपकपाती ठंड में 
चार पैसे कमाने की जुगत में,
यहाँ से वहाँ भटकता हुआ 
सवारी की तलाश में 
है परेशान बैठा हुआ वो ऑटो वाला || 

Thursday, September 1, 2011

बोला दमनक

होम कर संपूर्ण सृष्टि 
जहाँ तलक थी उसकी दृष्टि |
सृष्टि जीवन को करके स्वाहा
नष्ट कर हर एक बाधा ||

क्रूरता,हाहाकार,मातम 
शुष्क साँसे,बंद साँसे |
हस्तिनापुर की वो यादें 
आधुनिक जयचंदों के वादें ||

सब समेट कर
कुछ विचार कर|
प्रलयंकारी आँखें वो सिसकी 
मौत की लीला छन भर को ठिठकी ||

भ्रष्टाचारियो की दुरात्मा  
जा चुकी थी दोजख के रास्ता ||

मंगल वेला का कर के स्वागत 
क्रूर मौत बंद कर अपनी आँखें |
शुभ सन्देश कर समर्पित 
प्राण-वायु कर प्रतिष्ठित ||

 स्वलोक पधारी वो शक्ति
देख उस समाज प्रगति |
था अब दमनक यूँ बोला 
"हो दशक बाद फिर हमारा बोलबाला "

Saturday, July 16, 2011

अनंत की तलाश में

अनंत की तलाश में भटकता हूँ,
प्रकाश की डोर तलाशता हूँ |
देर रात तक जगता हूँ ,
बाँध टकटकी तारे तकता हूँ|
वीरान उजाड़ हवेली में अब भी रहता हूँ

मैं अनंत की तलाश में भटकता हूँ ||
 
हर रात डरकर सोता हूँ ,
सूरज की किरणों से भी अब घबराता हूँ |
क्यूँ जाने से बाहर कतराता हूँ,
कुशलक्षेम पूछे को व्याकुल रहता हूँ |
माचिस की तीली से भी डर जाता हूँ 
 
अब हर रात मैं डरकर सोता हूँ ||

मीठी मीठी बातों से झुँझलाता हूँ,
तीखे व्यंग्य हंसकर झेल जाता हूँ |
दोस्तों के साथ जाने से डर जाता हूँ,                                  
दुश्मनों संग बैठ ठहाके लगाता हूँ |
 किसी पर नही अब विश्वास कर पाता हूँ 

क्यूँ मीठी मीठी बातों से झुँझलाता हूँ ||
 
नेताओं की करता पूजा हूँ,
प्रताप-शिवा को देता गाली हूँ |
दुर्जन संग खुशियाँ लुटाता हूँ,
सज्जनो से परे हट जाता हूँ|
अमावस की रात चाँदनी नहाता हूँ

 मैं अनंत की तलाश में भटकता हूँ ||